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Monday, March 9, 2026

पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष: UN की रिपोर्ट के 5 सबसे चौंकाने वाले सच

पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष: UN की रिपोर्ट के 5 सबसे चौंकाने वाले सच प्रस्तावना वर्तमान में दक्षिण एशिया की भू-राजनीति एक अत्यंत संवेदनशील मोड़ पर है, जहाँ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मध्य बढ़ती 'सामरिक अस्थिरता' (Strategic Instability) ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। पाकिस्तान द्वारा अफगान सीमा के भीतर संचालित हालिया एयरस्ट्राइक्स को इस्लामाबाद ने 'आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक प्रहार' के रूप में विज्ञापित किया है। हालाँकि, संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया रिपोर्ट ने इन दावों की क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) पर गहरा प्रहार किया है। यह लेख केवल एक सैन्य संघर्ष का विवरण नहीं है, बल्कि इस बात का गहन विश्लेषण है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद से लड़ रहा है या अपनी आंतरिक और रणनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए निर्दोष नागरिकों की बलि दे रहा है। -------------------------------------------------------------------------------- 1. 'ऑपरेशन गजब हक' का भयावह सच—दावे बनाम जमीनी हकीकत पाकिस्तान ने अपनी हालिया सैन्य कार्रवाई को 'ऑपरेशन गजब हक' (Righteous Fury) का नाम देकर इसे एक न्यायसंगत युद्ध के रूप में प्रस्तुत किया। इस सैन्य अभियान का मुख्य उत्प्रेरक (Trigger) इस्लामाबाद की एक मस्जिद में हुई बमबारी थी, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने आक्रामक रुख अपनाया। सेना का दावा था कि उन्होंने टीटीपी (TTP) के 527 उग्रवादियों को समाप्त कर दिया है। इसके विपरीत, 'यूनाइटेड नेशंस असिस्टेंस मिशन इन अफगानिस्तान' (UNAMA) की रिपोर्ट एक विचलित करने वाली हकीकत बयां करती है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक्स में कम से कम 185 नागरिक हताहत हुए हैं। विशेष रूप से 27 फरवरी को पक्तिका प्रांत में हुए हमलों में 14 नागरिक मारे गए, जिनमें 5 महिलाएं और कई मासूम बच्चे व बुजुर्ग शामिल थे। "पाकिस्तान ने जो अफगानिस्तान में लोगों को मारा है... ये मैं नहीं कह रहा हूं यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट कह रही है... इसमें बच्चे मारे गए हैं।" — सिद्धांत अग्निहोत्री ये 'फर्जी स्ट्राइक्स' न केवल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं, बल्कि यह पाकिस्तानी सैन्य विमर्श (Military Narrative) के खोखलेपन को भी उजागर करती हैं। 2. टीटीपी (TTP): भस्मासुर का उदय और अमेरिकी हथियारों का जखीरा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) आज पाकिस्तान के लिए वह 'भस्मासुर' बन चुका है जिसे उसने स्वयं निर्मित किया था। 2007 में अलकायदा से अलग होकर बना यह समूह विचारधारा से अधिक एक 'मर्सिनरी ग्रुप' (Mercenary Group) यानी भाड़े के सैनिकों का समूह है। इनका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान की उस 'सामरिक गहराई' (Strategic Depth) की नीति को चुनौती देना है जो कभी अमेरिका के पक्ष में खड़ी थी। टीटीपी की बढ़ती घातक शक्ति का एक बड़ा कारण अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद छोड़े गए अत्याधुनिक हथियारों की कालाबाजारी (Black Marketing) है। इन उन्नत हथियारों ने टीटीपी को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के विरुद्ध एक खतरनाक बढ़त दे दी है। पाकिस्तान अक्सर इन हमलों के लिए भारत पर निराधार आरोप लगाता है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद आज तक भारत की संलिप्तता का कोई भी ठोस 'क्रेडिबल एविडेंस' पेश करने में विफल रहा है। 3. रणनीतिक विफलता: हक्कानी नेटवर्क और 'उल्टा पड़ा ताऊ' दशकों तक पाकिस्तान ने हक्कानी नेटवर्क को अपनी 'प्रॉक्सी वॉर' (Proxy War) के एक प्रभावी औजार के रूप में पोषित किया। योजना यह थी कि इस समूह का उपयोग भारत के विरुद्ध एक रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए किया जाएगा। लेकिन आज यह 'इन्वेस्टमेंट' पूरी तरह विफल हो चुका है। पाकिस्तान के लिए स्थिति अब "उल्टा पड़ गया ताऊ" वाली हो गई है, जहाँ हक्कानी नेटवर्क अब पाकिस्तान की बात मानने के बजाय उसके लिए ही सुरक्षा जोखिम पैदा कर रहा है। विडंबना देखिए कि एक तरफ पाकिस्तान नागरिक बस्तियों पर बमबारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उबैदुल्लाह मसूद जैसे प्रमुख उग्रवादी नेता पाकिस्तान की नाक के नीचे खुलेआम घूम रहे हैं। यह दोहरा मापदंड पाकिस्तान की रणनीतिक विफलता की पराकाष्ठा है। 4. वैश्विक शतरंज: रूस, चीन और बगराम का सामरिक महत्व अफगानिस्तान अब वैश्विक महाशक्तियों के हितों का केंद्र बन गया है, जहाँ पाकिस्तान की भूमिका निरंतर गौण होती जा रही है: * रूस और चीन की भूमिका: रूस ने तालिबान को कूटनीतिक मान्यता देकर पाकिस्तान के एकाधिकार को चुनौती दी है। वहीं चीन, तालिबान का समर्थन तो कर रहा है, लेकिन वह 'ईटीआईएम' (ETIM) आंदोलन के प्रसार से आतंकित है, जो उसके शिनजियांग प्रांत के लिए खतरा है। * बगराम और अमेरिका: अमेरिका (विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप के दृष्टिकोण से) पुनः बगराम एयरबेस में रुचि ले रहा है। बगराम की भौगोलिक स्थिति ईरान और पश्चिम एशिया पर निगरानी रखने के लिए सर्वोत्तम है। * पाकिस्तान का उपयोग: आर्थिक रूप से जर्जर पाकिस्तान वर्तमान में अमेरिका के लिए एक 'अनसेड बेस' (Unsaid Base) यानी अघोषित सैन्य अड्डे के रूप में कार्य कर रहा है, ताकि वह अमेरिकी फंडिंग के बदले उनके हितों की रक्षा कर सके। 5. सूचना युद्ध (Information Warfare) और आंतरिक अस्थिरता आधुनिक युद्ध केवल सीमा पर नहीं, बल्कि सूचना के धरातल पर भी लड़ा जा रहा है। तालिबान ने पाकिस्तान के विरुद्ध प्रभावी 'इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर' छेड़ रखा है। हाल ही में तालिबान द्वारा पाकिस्तानी सैनिकों को बंधक बनाने और उनके वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की घटनाओं ने पाकिस्तानी सेना के मनोबल को गहरी क्षति पहुँचाई है। बलूचिस्तान में सैनिकों की गिरफ्तारी और बढ़ती उग्रवादी घटनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि पाकिस्तान केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि आंतरिक रूप से भी बिखर रहा है। जब राज्य की सेना का वीडियो सार्वजनिक रूप से अपमानजनक स्थितियों में जारी किया जाता है, तो यह 'स्टेट फेल्योर' (State Failure) का स्पष्ट संकेत होता है। -------------------------------------------------------------------------------- निष्कर्ष इतिहास गवाह है कि अफगानिस्तान सदैव "साम्राज्यों का कब्रिस्तान" (Graveyard of Empires) रहा है। जिस मिट्टी ने सोवियत संघ और अमेरिका जैसी महाशक्तियों को पस्त कर दिया, वहां पाकिस्तान की घुसपैठ उसके अपने अस्तित्व के लिए आत्मघाती सिद्ध हो सकती है। UN की रिपोर्ट यह चेतावनी देती है कि निर्दोषों का रक्त बहाकर और फर्जी नैरेटिव गढ़कर कोई भी देश अपनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता। अंतिम विचार: क्या पाकिस्तान की अपनी ही 'विरोधाभासी नीतियां' और 'प्रॉक्सी समूहों' पर निर्भरता उसे उसी अंत की ओर ले जा रही है, जिससे वह दशकों से बचने का प्रयास कर रहा था? यह संघर्ष अब केवल दो देशों की सीमा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया के भविष्य का फैसला करेगा।

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